किसानों को दिया सब्जी उत्पादन का प्रशिक्षण
विकासनगर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने शनिवार को युवा कल्याण समिति सैंज अटाल के माध्यम से तहसील क्षेत्र के ग्रामीणों को बेमौसमी सब्जी उत्पादन का प्रशिक्षण दिया। साथ ही उच्च किस्म के बीज निशुल्क वितरित किए गए। विशेषज्ञों ने काश्तकारों को जैविक खेती के माध्यम से सब्जी उत्पादन कर आर्थिक संसाधनों में वृद्धि करने को प्रेरित किया। साथ ही बेमौसमी सब्जी उत्पादन के लिए मृदा परीक्षण करने की सलाह दी।
कृषि वैज्ञानिक डा. दीपक बिष्ट ने जैविक और वैज्ञानिक विधि से सब्जी उत्पादन के गुर बताते हुए कहा कि आलू उगाते समय दो पौधों के बीच उचित दूरी रखी जानी जरूरी है। जिससे पौधे की जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। साथ ही खेतों में अधिक कीटनाशक के प्रयोग से बचना चाहिए। ढालदार खेतों के किनारे मेढ़ तैयार कर बरसात के पानी को रोका जाना जरूरी है। जिससे मिट्टी की उर्वरता बची रहने के साथ ही पौधों को पर्याप्त पानी मिल सके। साथ ही समय-समय पर निराई-गुड़ाई कर खेतों से खरपतवार निकालने की विधियों से भी काश्तकारों को अवगत कराया गया। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बेमौसमी सब्जी उत्पादन अधिक किया जाता है। काश्तकारों को सब्जी उत्पादन कर अपने जीवन स्तर में सुधार लाने की कोशिश करनी चाहिए। इस दौरान सैंज, अटाल, फिडीज के अनुसूचित जाति के किसानों को प्रशिक्षण दिया गया। समिति के अध्यक्ष बसंत शर्मा, रमन राणा, तुलाराम शर्मा आदि मौजूद रहे।
