परत दर परत खुल रहे घोटालों के राज, अब ट्रांसपोर्ट नगर में दो करोड़ के भूखंड मिले फर्जी
लखनऊ।
ट्रांसपोर्ट नगर योजना में भूखंडों के फर्जी मिलने का सिलसिला जारी है। दो करोड़ के दो भूखंड फिर फर्जी मिले हैं। पांच अन्य भूखंड की जांच की जा रही थी, इनमें जी 129, ई 433 का आवंटन गलत तरीके से पाया गया है। पैसा भी कम जमा हुआ है। वहीं भूखंड संख्या ई 181, एमजी वन, एमजी टू, ई 173 की फाइलें नहीं मिल रही हैं। यह भूखंड 140 से 200 वर्ग मीटर के हैं।
मामले की जांच कर रहे अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा के मुताबिक जी 18/308, जी 34/308 फेस टू भी संदेह के घेरे में हैं। इनकी भी फाइलें निकलवाई जा रही हैं। वहीं एफ 481की जांच भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (लविप्रा) अपने भूखंडों पर कब्जा लेने के साथ ही फर्जी आवंटन को लेकर मुकदमा भी दर्ज कराएगा। बता दें कि लविप्रा पहले तीन भूखंडों पर कब्जा ले चुका है। सचिव पवन कुमार गंगवार ने बताया कि जिन भूखंडों के खिलाफ एफआइआर हो रही है, लविप्रा उस पर अपना कब्जा लेकर नीलाम करेगा। उनके मुताबिक यह प्रकिया सितंबर 2021 से शुरू हो जाएगी।
गोमती नगर के भूखंडों पर शिकंजा कसना शुरू: लविप्रा ने गोमती नगर के 15 भूखंडों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 3/43 विभूति खंड का नक्शा निरस्त करने, 2/1 बी विक्रांत खंड में मुकदमा दर्ज कराने सहित विकल्प खंड का भूखंड संख्या 1/10 एच पर चल रहे निर्माण कार्य को सचिव लविप्रा ने रोक दिया है। अधिशासी अभियंता अवनींद्र कुमार ङ्क्षसह ने बताया कि मौके पर निर्माण करवा रहे व्यक्ति द्वारा डेढ़ साल पहले नक्शा भी पास करवाया था। अब लविप्रा ने रजिस्ट्री की जांच होने तक निर्माण कार्य रोक दिया है।
जान्ह्वी इंफ्रा डेवलपर्स के मालिक पर करोड़ों की ठगी का मुकदमा
जान्ह्वी इंफ्रा डेवलपर्स के मालिक राजीव कुमार विश्वकर्मा और उनकी पत्नी सावित्री ने करीब 40 से अधिक लोगों के साथ करोड़ों की ठगी की। दोनों ने लोगों से निवेश के नाम पर रुपये कंपनी में लगवाए। इसके बाद मोबाइल बंद कर सुसाइड नोट छोड़कर भाग निकले।
इंस्पेक्टर चिनहट घनश्यामणि त्रिपाठी ने बताया कि मंगलवार देर रात दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। राजीव ने लौलाई में आफिस खोला था। जिसमें पत्नी को सावित्री को प्रोपराइटर बना दिया। इंस्पेक्टर के मुताबिक राजीव विश्वकर्मा प्लाट दिलाने के नाम पर और रुपये दोगुना करने का झांसा 40 से अधिक लोगों से करोड़ों की ठगी की। ब्रजेश कुमार से 27 लाख रुपये, मनीष से 45 लाख, महेंद्र प्रताप सिंह से 1.45 करोड़ रुपये, अभिषेक कुमार श्रीवास्तव से 11.33 लाख, बाबू लाल से 15 लाख, हरीश कुमार वर्मा से 8.85 लाख, संतोष वर्मा से 10 लाख, शोभा यादव से पांच लाख, आशुतोष कुमार शाह से 7.25 लाख। इस तरह से 40 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये का निवेश कराया। सारा रुपया मार दिया और इसके बाद सुसाइड नोट छोड़कर पत्नी और बच्चों संग भाग गया था। राजीव और उसके परिवारीजनों की तलाश की जा रही है।
