कड़ाके का ठंड और जान की जोखिम के बीच यूक्रेन में अब टूट रही भारतीयों की हिम्मत

नई दिल्ली

युद्धग्रस्त देश यूक्रेन में धमाकों, हवाई हमलों और कड़ाके की ठंड के बीच सूमी शहर से निकलने का इंतजार कर रहे भारतीय छात्रों के लिए परेशानियों से भरा साबित हो रहा है। छात्रों ने कहा कि अब उनकी हिम्मत जवाब देने लगी है। छात्र आशिक हुसैन सरकार ने रुंधे गले से कहा, ‘हम हाड़ गला देने वाली सर्दी में तीन घंटे तक बसों में चढ़ने के लिए कतार में खड़े रहे और अब हमें कह दिया गया कि हम जा नहीं सकते। यह सब कब खत्म होगा? हमारी हिम्मत जवाब दे रही है। सब्र का बांध टूट रहा है। हमें अभी भी कोई अपडेट नहीं मिला है।’
सूमी में करीब 700 भारतीय छात्र फंसे हुए हैं जहां रूस और यूक्रेन के सैनिकों के बीच पिछले कुछ दिन से भीषण संघर्ष चल रहा है। शहर से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत प्रयास कर रहा है लेकिन भारी गोलाबारी और हवाई हमलों की वजह से उसे सफलता नहीं मिल पा रही। मेडिकल छात्रा जिसना जिजी ने कहा, ‘भारतीय दूतावास ने हमें यहां से 174 किलोमीटर दूर पोलटावा ले जाने के लिए पांच-छह बसें भेजी थीं। हम इन बसों में चढ़े लेकिन हमें कुछ ही देर बाद उतरने के लिए कह दिया गया। दूतावास ने हमें बताया कि अगली सूचना तक इंतजार करें। हमने इंतजार करने का फैसला किया है।’ मेडिकल की चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रहे अजीत गंगाधरन ने कहा, ‘हम पैदल निकलने के लिए तैयार ही थे, लेकिन सरकार ने हमें रुकने और कोई जोखिम नहीं लेने को कहा। हम रुक गये, लेकिन कब तक?’ यूक्रेन के उत्तर पूर्वी शहर में फंसी हुई एक भारतीय छात्रा ने एक वीडियो संदेश में कहा कि वह और कुछ छात्र पिछले 10 दिन से इंतजार कर रहे हैं लेकिन उम्मीद की कोई किरण नहीं दिखाई दे रही कि उन्हें कब वहां से निकाला जाएगा।
सूमी स्टेट यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली छात्रा ने बताया कि वहां न बिजली है, न पानी आ रहा है और दुकानदार क्रेडिट या डेबिट कार्ड नहीं ले रहे, वहीं एटीएम में भी पैसा नहीं है। उसने कहा, ‘हम जरूरी सामान और खाने की चीजें भी नहीं खरीद पा रहे।’ सूमी में फंसे भारतीय छात्रों ने शनिवार को एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर डालकर घोषणा की थी कि उन्होंने संघर्ष के बीच कड़ाके की सर्दी में रूस की सीमा तक पैदल जाने का जोखिम लेने का फैसला किया है। इसके बाद दिल्ली में सरकारी हलके में उनकी सुरक्षा को लेकर आशंकाएं पैदा हो गयीं। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने कहा कि सूमी में फंसे भारतीय छात्रों की पोलटावा से होते हुए पश्चिमी सीमाओं तक सुरक्षित निकासी में समन्वय के लिए मिशन का एक दल पोलटावा शहर में तैनात है। छात्रों को संक्षिप्त नोटिस पर निकलने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से फोन पर बात की और सूमी में फंसे भारतीय छात्रों को निकालने में उनका ‘सहयोग’ मांगा।

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