पूर्व मण्डलीय मंत्री शिव सिंह नेगी ने शिक्षकों की समस्याओं को उजागर किया

जखोली। राजकीय शिक्षक संघ का दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन जीआईसी अल्मोड़ा में संपन्न होगा, जिसमें शिक्षक छात्र छात्राओं के शैक्षिक स्तर में सुधार के साथ साथ शिक्षक हितों के संरक्षण और तमाम समस्याओं के समाधान के लिए अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन भी करेंगे। शिक्षक संघ के पूर्व मण्डलीय मंत्री शिव सिंह नेगी ने शिक्षकों की समस्याओं को उजागर करते हुए कहा है कि शिक्षकों की पदोन्नति,पुरानी पेंशन बहाली ,स्थानान्तरण,अंतरमंडलीय स्थानान्तरण,अटल उत्कृष्ट से संबंधित प्रकरण,तदर्थ शिक्षकों का चयन/ प्रोन्नत वेतनमान विसंगति,वेतन विसंगति, समायोजित शिक्षकों की विसंगति,द्वितीय वर्ष में सी सी एल प्रकरणों पर वेतन कटौती,यात्रावकाश आदि समस्याओं का निस्तारण न होने से शिक्षकों के बीच आक्रोश ओर निराशा का माहौल व्याप्त है। आगामी 6 और 7 जुलाई को होने वाले अधिवेशन में भाग लेने वाले शिक्षक जहां छात्र छात्राओं के बेहतर शैक्षिक गुणवत्ता विषय पर चर्चा परिचर्चा करेंगे वहीं अधिवेशन के दूसरे दिन शिक्षक अपने समस्याओं के समाधान के लिए प्रांतीय नेतृत्व का चुनाव भी करेंगे। जिसमें प्रांतीय अध्यक्ष,उपाध्यक्ष, महामंत्री, संघटन मंत्री आदि पदों के लिए निर्वाचन की प्रक्रिया सम्पन्न होगी। जिसे लेकर शिक्षक शोसियल मीडिया,प्रिंट मीडिया सहित तमाम तरह तरीकों से अपने अपने बात आम शिक्षकों के बीच साझा करने में लगे हैं। हाल ही में अधिवेशन की तिथि घोषित होने के बाद प्रांतीय महामंत्री पद पर आनलाइन प्री पोल सर्वेक्षण प्रत्याशियों के बीच कराया गया, जिसमें शिव सिंह नेगी को सबसे अधिक 52 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। वहीं मत प्रतिशत के हिसाब से डा.अंकित जोशी दूसरे,रमेश पैन्यूली तीसरे,बलवन्त सिंह नेगी और एकता रस्तोगी को चौथे स्थान पर दिखे। कुल मिलाकर कर शोसियल मीडिया के प्री पोल सर्वेक्षण की माने तो शिव सिंह नेगी ने इसमें अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाने में कामयाबी हासिल कर ली है, वैसे इन परिणामों का शिक्षक संघ के चुनाव परिणाम से कोई ताल्लुक नहीं है, फिर भी मनोवैज्ञानिक रूप से शिव सिंह नेगी ने अपने प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त बनाने का काम किया है। सांगठनिक क्षमता के तौर तरीकों की बात भी कई शिक्षक प्रत्याशी शिक्षकों के बीच रख रहे हैं। जिसमें महामंत्री पद की दावेदारी कर रहे शिव सिंह नेगी का दावा है कि वे ढाई दशकों से ब्लॉक,जनपद,मंडल स्तर पर शिक्षकों के हितों की सुरक्षा के लिए आंदोलन, शासन और सरकार से वार्ता,धरना,प्रदर्शन,तालाबंदी और आमरण अनशन जैसे कार्यक्रमों में निस्वार्थ भाव से प्रतिभाग करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि विगत छः वर्षों में वे पदाधिकारी न होते हुए भी शिक्षकों के ज्वलंत मुद्दों के समाधान हेतु सदैव संघर्षरत रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि इस सांगठनिक यात्रा में विभागीय अधिकारियों,शासन में तैनात अधिकारियों और मुख्यमंत्री,मंत्रीगणों के साथ वार्ता आदि के फलस्वरूप प्राप्त अनुभव का  विभिन्न प्रकरणों को हल करने हेतु वे सदुपयोग करना व अपना नैतिक दायित्व समझते हुए शिक्षकों व शिक्षिकाओं को आश्वस्त कर रहे हैं कि कभी भी सांगठनिक एकता का दुरुपयोग अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए न करने के बजाय वे संगठन हित में करेंगे। अन्य प्रत्याशियों से संपर्क कर उनकी प्राथमिकताओं को सार्वजनिक किया जायेगा।

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