नदियों को बचाने के लिए बने उत्तराखंड नदी प्राधिकरण

पौड़ी। ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय द्वारा पौड़ी परिसर में राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित किया गया। वेबीनार में वक्ताओं ने विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। वेबीनार में मुख्य वक्ता पूर्व विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग जेएस रावत द्वारा हिमालय में हो रहे भौगोलिक परिवर्तनो, ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावो, सूख रही नदियों की स्थिति आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि हिमालय को बचाने के लिए नदियों को बचाना आवश्यक है। नदियों को बचाने के लिए उत्तराखंड नदी प्राधिकरण गठित करना नितांत आवश्यक है। जिससे प्राधिकरण द्वारा जवाबदेही सहित नदियों के पुनर्जन्म का कार्य वैज्ञानिक तरीके से प्रारंभ किया जा सके। कहा कि हिमालय क्षेत्र में सड़कों के निर्माण हेतु कट ऐण्ड थ्रो टेक्नीक को अपग्रेड कर सड़कों का निर्माण कट ऐण्ड फिल टेक्नीक द्वारा किया जाना चाहिए। भूगोल विभाग की विभागाध्यक्षा एवं ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय की अध्यक्ष प्रो. अनिता रूडोला ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्र में सड़कों के अविवेकपूर्ण चौड़ीकरण से न सिर्फ़ असंख्य पौधो का कटाव हुआ है बल्कि पहाड़ों के कटाव से भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ी हैं और भूस्खलन के नए ब्लीडिंग ज़ोन भी बन गए हैं। सोसाइटी के संरक्षक प्रो. कमलेश कुमार ने बताया कि हिमालय दिवस के अवसर पर ज्योग्राफिकल सोसाइटी ऑफ सेंट्रल हिमालय उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में व्याप्त पर्यावरण संबंधी व्यावहारिक समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट करना चाहती है। इस दौरान भूगोल विभाग द्वारा बनाई गई पुष्प वाटिका में डा. अभिलेख जगूड़ी के साथ मिलकर सभी छात्र-छात्राओं ने विद्या नर्सरी बैंगवाड़ी के कुलदीप नौड़ियाल के सहयोग से प्राप्त फूलों के 50 पौधों का रोपण भी किया। इस मौके पर प्रो. वीपी सती, पूर्व प्राचार्य डा. राजेंद्र भंडारी, डा. राजेश भट्ट, डा. किरण त्रिपाठी, सोसाइटी की कोषाध्यक्ष डा. केएस बिष्ट, सहसचिव मंजू भंडारी, डा. अनिल दत्त, शोध छात्र, मनदीप सिंह, वीर सिंह, रियाज आदि शामिल रहे।

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