बीर चन्द्र सिंह गढ़वाली को दी श्रद्धान्जलि

देहरादून। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राजपुर रोड पर गांधी पार्क के समीप स्थित कार्यालय में रविवार को 44 वीं पुण्यतिथि पर वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली को श्रद्धान्जलि अर्पित की गई। सचिव सीपीआईएम अनंत आकाश ने इस अवसर पर बताया कि जब देश में सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रथम चरण में था तभी 23 अप्रैल 1930 को पेशावर के किस्साखानी बाजार में सैनिक विद्रोह की ऐतिहासिक घटना हुई थी। भारतीय गढ़वाली सैनिकों ने अपने देश के विरुद्ध बन्दूकों का इस्तेमाल करने से इन्कार कर अंग्रेजी साम्राज्य की नींव को हिला दिया था। उन्होंने कहा कि इसके महानायक बीर चन्द्र सिंह गढ़वाली 1891 में गढ़वाल के एक साधारण किसान परिवार में पैदा हुए। पेशावर विद्रोह के बाद बिट्रिश सरकार ने उन्हें 26 सितंबर 1941 तक जेल में रखा। पेशावर विद्रोह से पहले प्रेरित होकर नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज संगठित की थी। जेल से रिहाई के बाद उन्होंने देश को आजाद करवाने के लिए आंदोलन में हिस्सा लिया। 1946 से गढ़वाल कुमांऊ के विकास के मुद्दों पर संघर्ष किया। 1 अक्टूबर 1979 को दिल्ली में उन्होंने अन्तिम सांस ली। वह जीवन पर्यन्त मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े रहे।

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