पूर्व प्रधान, सचिव और जेई पर 19 लाख के गबन में केस

रुड़की। अकौढ़ा कलां की पूर्व महिला प्रधान, पंचायत सचिव और जेई सहित 5 लोगों के खिलाफ पुलिस ने मनरेगा योजना के करीब 19 लाख रुपये के गबन का मुकदमा दर्ज किया है। आरटीआई से गबन का खुलासा होने एक अधिवक्ता ने एसीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। अकौढ़ा कलां के अधिवक्ता विकास पंवार ने आरटीआई के तहत पिछले साल गांव में हुए विकास कार्यों की सूचना ली थी। पता चला कि मनरेगा योजना से श्मशान घाट वाले तालाब पर 4,79378 रुपये, मोहम्मदावाला तालाब पर 4,42971 रुपये, नाइयों वाले तालाब पर 3,91431 रुपये और मेनरोड वाले तालाब पर 3,74933 (कुल 18,88713) रुपये सौंदर्यीकरण और सफाई पर खर्च दिखाए गए हैं। अधिवक्ता विकास ने इस मामले में शासन-प्रशासन से शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि एक भी तालाब में सफाई और सौंदर्यीकरण कार्य नहीं हुआ है। फर्जी बिल से 19 लाख का गबन किया गया है। शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो विकास ने एसीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया। कोतवाल यशपाल बिष्ट ने बताया कि अकौढ़ा कलां की पूर्व प्रधान आमना बेगम, उनके पति सलीम अहमद, बेटे सनम, तत्कालीन पंचायत सचिव विपिन पाटनी और मनरेगा के जेई सौरभ श्रीवास्तव के खिलाफ धोखाधड़ी, षड़यंत्र और कूट रचना की धारा में केस दर्ज कर जांच की जा रही है। उधर, प्रधानपति सलीम अहमद का कहना है कि कई बार जांच में शिकायत गलत पाई गई है। राजनीतिक दुर्भावना की वजह से झूठा मुकदमा लिखवाया गया है।

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