धर्म का आचरण करना ही वास्तविक धर्म
ऋषिकेश। एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा ईश्वर यह मंत्र के दृष्टा बाबा फुलसंदे ने कहा कि अतृप्त कामनाएं समुद्र के ज्वार भाटे व कोलाहल की तरह है। मन तृष्णा की आग में जल रहा हो तो इंद्र का नंदन वन भी व्यर्थ है। मन के पीछे चल कर सारा संसार परेशान रहता है।
ररामनगर स्थित राम मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय सत्संग में श्रद्धालुओं को धर्म प्रवचन कर रहे बाबा फुलसंदे ने कहा सब दुख उठाते हैं और जीवन भर अशांत बने रहते हैं। आत्माएं धन्य है जो उस परम ब्रह्म के प्रकाश में बसे हुए हैं। संसार में वे चाहे दुख के कंकड़ चुगते फिरे किंतु परमात्मा आदि पुरुष कभी भी उनका साथ नहीं छोड़ता। उन्होंने कहा कि सुख-दुख तो आते रहते हैं। लेकिन परम मित्र अपने हृदय में एक जैसे बने रहते हैं। धर्म ग्रंथों का पाठ करते रहना धर्म नहीं होता, धर्म का आचरण ही वास्तव का धर्म है। चमक दमक दिखाना और बात है तथा उस प्रभु का मित्र बनना और बात है। बाबा ने कहा कि नारियों का सम्मान करो क्योंकि वह निराकर ब्रह्मा सबसे पहले एक शिशु के रूप में नारी की कोख से ही प्रकट हुआ है। भारतवर्ष को देश है जहां स्वर्ग के देवता मनुष्य बनकर जन्म लेते हैं और स्वयं को धन्य मानते हैं। अशोक शर्मा आर्य ने सभी आगंतुकों का आभार जताया आज के दव्यि सत्संग बाबा फुलसंदे का तुलादान मानव सेवा के लिए किया गया। इस दौरान राजपाल सिंह,महेंद्र काला, शादीलाल लखानी, भीमसेन,अभिषेक कपूर,अक्षत वीर भटेजा,बीर सिंह,नवल,अजय चौधरी, रमेश भटेजा,राजकुमार उपाध्याय, संजय छाबड़ा, सुषमा मदान,भावना शर्मा,मधु,जानकी सहित सभी समाजसेवी एवं श्रद्धालु सत्संग में उपस्थित रहे।
