सुनीता ठाकुर को हिरासत में लेने पर राज्य आंदोलनकारी भड़के

देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सयुंक्त मंच के तत्वावधान में राज्य आंदोलनकारियों को राजकीय सेवाओं में 10% क्षैतिज आरक्षण बहाल करने व चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूर्ण करने की मांग को लेकर आंदोलन के सातवें दिवस पुलिस प्रशासन ने सुबह आंदोलनकारी सुनीता ठाकुर को हिरासत में ले लिया। बाद में ऑफिसर इंचार्ज शालिनी नेगी के इस आश्वासन पर कि आंदोलनकारियों की वार्ता मुख्यमंत्री से करवाई जायेगी पर सुनीता ठाकुर ने आत्मदाह की जिद छोड़ दी, आंदोलनकारी उन्हें अपने साथ शहीद स्मारक ले आए जहां वे आमरण अनशन पर बैठ गई हैं।
पुलिस ने आत्मदाह की चेतावनी देने वाली राज्य आंदोलनकारी सुनीता ठाकुर को दर्शनलाल चौक से हिरासत में ले लिया था। जिन्हें पहले धारा चौकी व बाद में कोतवाली और उसके भी बाद लक्ष्मणचौक पुलिस चौकी लाया गया। सुनीता ठाकुर ने इस तरह हिरासत में लेने का विरोध किया। सूचना मिलने पर अन्य राज्य आंदोलनकारी भी मौके पर पहुंच गए। आंदोलनकारियों का कहना था कि प्रशासन को सुनीता ठाकुर की बात सुनने के लिए शहीद स्मारक पर आना चाहिए। इस तरह से बीच सड़क पर हिरासत में लेना सही तरीका नहीं है। वह संवैधानिक रुप ये आंदोलन कर रही हैं। राज्य आंदोलनकारी के तीव्र विरोध व सुनीता ठाकुर द्वारा आत्मदाह की जिद छोड़ने पर पुलिस को उन्हें छोड़ना पड़ा। जिसके बाद आंदोलनकारी नारेबाजी करते हुए शहीद स्मारक पहुंच गए। सुनीता ठाकुर ने यहां आमरण अनशन शुरू कर दिया है। उनके समर्थन में उत्तरकाशी धनारी के बुजुर्ग आंदोलनकारी खुशपाल सिंह परमार ने भी अन्न जल त्यागने की घोषणा कर दी। उनका कहना था कि सरकार ज्यादा दिनों तक राज्य आंदोलनकारियों को बरगला नहीं सकेगी। उन्हें क्षैतिज आरक्षण व चिन्हीकरण पर स्थिति साफ करनी ही पड़ेगी। आंदोलनकारियों ने शहीद स्मारक पर सभा कर सुनीता ठाकुर को हिरासत में लेने की निंदा की। धरने में बैठने वालों में राम किशन, सुनीता ठाकुर, अंबुज शर्मा, सूर्यकांत शर्मा, सुरेश कुमार, सुरेंद्र पंवार, सरला शर्मा, जगदीश पन्त, कुन्ती शर्मा, किरण डोभाल, प्रदीप कुकरेती, लोक बहादुर थापा, सत्या पोखरियाल, शिव प्रसाद सेमवाल, राजेन्द्र पन्त, सुलोचना इष्टवाल, विपुल नौटियाल, मुन्नी खंडूड़ी, प्रभात डंडरियाल, रेखा शर्मा, अभिषेक बिष्ट, रामचन्द्र नौटियाल, मीरा गुसाईं, सरला शर्मा, नवनीत गुसाईं, प्रवीण पुरोहित आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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