देश के दिग्गज खिलाड़ी नाटेकर का हुआ निधन, खेल जगत में शोक की लहर
नई दिल्ली ।
देश के दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी नंदू नाटेकर का आज सुबह निधन हो गया है। नंदू पहले भारतीय ऐसे बैडमिंटन खिलाड़ी थे जिन्होंने इंटरनेशनल खिताब जीता था। उन्होंने यह उपलब्धि 1956 में हासिल की थी। वह 88 साल के थे और इस समय पुणे में रह रहे थे। उन्हें 1961 में अर्जुन अवॉर्ड मिला था और वह यह पुरस्कार हासिल करने वाले भारत के पहले बैडमिंटन खिलाड़ी थे। नंदू ने छह बार नेशनल चैंपियनशिप का खिताब जीता था। अपने करियर में 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाले नाटेकर उम्र संबंधित बीमारियों से पीडि़त थे। उनके परिवार में बेटा गौरव और दो बेटियां हैं। बेटे गौरव ने बताया कि पिता जी का घर में ही निधन हुआ और हम सभी उनके साथ थे। वह पिछले तीन महीने से बीमार थे।अपने समय के सबसे लोकप्रिय खिलाडिय़ों में से एक माने जाने वाले नाटेकर दुनिया के पूर्व नंबर तीन खिलाड़ी थे। वह ऑल इंग्लैंड ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप के चर्टर फाइनल तक पहुंचे थे। उनका जन्म मई 1933 में सांग्ली में हुआ था। वह अपनी पसंद से बैडमिंटन खिलाड़ी बने थे। इससे पहले उन्होंने क्रिकेट में हाथ आजमाए थे और फिर टेनिस भी खेला था। वह जूनियर स्तर तक खेले थे। वह मशहूर रामानाथन कृष्णनन के खिलाफ भी खेले थे।
नंदू ने 1953 में 20 साल की उम्र में भारत के लिए अपना पहला मैच खेला था। अपने करियर में उन्होंन कई उपलब्धियां हासिल कीं। 1954 में वह ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के चर्टर फाइनल में पहुंच थे। इसके बाद वह कभी इस टूर्नामेंट में नहीं खेले। यह पहला और आखिरी मौका था जब वह इस टूर्नामेंट में खेले थे, लेकिन वह वेटर्नस कैटेगरी में इस टूर्नामेंट में खेले और 1980, 1981 में युगल वर्ग में जीत हासिल की जबकि 1982 में दूसरे स्थान पर रहे।
नाटेकर परिवार ने कहा कि बेहद दुख के साथ हम आपको सूचित करते हैं कि हमारे पिता नंदू नाटेकर का 28 जुलाई को निधन हो गया। कोविड-19 दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए हम शोक सभा का आयोजन नहीं करेंगे। कृपया अपने विचारों और प्रार्थना में उन्हें याद रखें।
एकल स्पर्धा में उनकी सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह थॉमस कप में 1951 से 1963 तक भारतीय टीम का हिस्सा थे और 16 में से 12 मैच जीतने में सफल रहे थे। वहीं युगल वर्ग में उन्होंने 16 में से आठ मैच जीते थे। 1959, 1961 और 1963 में वह टीम के कप्तान भी थे। उन्होंने पुरुष एकल वर्ग, युगल वर्ग और मिश्रित युगल वर्ग में नेशनल चैंपियनशिप भी जीतीं। 1956 में कुआलालंपुर में हुए सेलांगर इंटरनेशनल टूर्नामेंट में उन्होंने जीत हासिल की।
वह हिंदुस्तान पेट्रोलियन में बतौर पब्लिक रिलेशन ऑफिसर रहते हुए रिटायर हुए। उनके बेटे गौरव ने भी सफलता हासिल की लेकिन बैडमिंटन में नहीं बल्कि टेनिस में। वह डेविस कप में भारत की तरफ से खेले और 1996 में अर्जुन अवॉर्ड जीतने में सफल रहे।
