हड़ताल पीरियड में तैनात बाहरी विभागों के अधिकारी कर्मचारियों व यूजेवीएनएल कर्मियों में विवाद

विकासनगर।

उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा की हड़ताल के दौरान इमरजेंसी में पावर हाउस चलाने के लिए टीएचडीसी, एसजेवीएन व पीएसयू के अधिकारी कर्मचारियों की तैनाती को लेकर उत्तरांचल बिजली कर्मचारी संघ ने रोष जताया है। उत्तरांचल बिजली कर्मचारी संघ ने बाहरी विभागों के अधिकारी कर्मचारियों पर पावर हाउसों में अनाश्यक हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए उन्हें वापस भेजने की मांग को लेकर छिबरों पावर हाउस में प्रदर्शन कर नारेबाजी की।

उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के 26 जुलाई की मध्यरात्रि को हड़ताल पर चले जाने के बाद ऊर्जा विभाग ने यमुना घाटी की विद्युत परियोजनाओं को इमरजेंसी में चलाने के लिए टीएचडीसी, एसजेवीएन व पीएसयू के अधिकारी कर्मचारियों की वहां तैनाती की थी। 27 जुलाई को देर रात तक ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत से वार्ता के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल स्थगित कर दी थी। जिसके बाद तीनों निगमों के अधिकारी कर्मचारी अपनी अपनी ड्यूटी पर तैनात हो गये। लेकिन यमुना घाटी के विभिन्न पावर हाउसों में टीएचडीसी, एसजेवीएन व पीएसयू के अधिकारी कर्मचारी अब भी यहीं पावर हाउसों में डटे हैं। इससे यूजेवीएनएल के अधिकारी कर्मचारियों और टीएचडीसी, एसजेवीएन तथा पीएसयू के अधिकारी कर्मचारियों की आपस में ठन गयी है। यूजेवीएनएल के अधिकारी कर्मचारियों का कहना है कि बाहरी विभागों से आये अधिकारी कर्मचारी उनके कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप कर रहे हैं। जबकि उनका यहां के पावर हाउस में बैठने का कोई औचित्य नहीं है। उन्हे तुरंत अपने विभागों में जाना चाहिए। लेकिन वे यहां बैठकर विवाद कर रहे हैं। इससे आक्रोशित होकर उत्तरांचल विद्युत अधिकारी कर्मचारी संघ ने छिबरों पावर हाउस के परिसर में प्रदर्शन कर शासन प्रशासन के खिलाफ व बाहरी विभागों से आये अधिकारी कर्मचारियों को वापस भेजे जाने को लेकर नारेबाजी की। उत्तरांचल विद्युत कर्मचारी संघ ने ऊर्जा सचिव को ज्ञापन प्रेषित कर तत्काल टीएचडीसी, एसजेवीएन व पीएसयू के अधिकारी कर्मचारियों को वापस उनके विभागों में भेजने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में संघ के याकूब अली,मान सिंह, शशांक रावत, नरेश, राकेश, पिंटू, सुभाष चंद्र, अंकित, यशपाल, फहमूद्दीन, खजानसिंह, सुनील कुमार, आदि शामिल रहे।

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