400 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य की चुनौती को पूरा करने का गोयल का आह्वान

मुंबई ।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि राष्ट्र वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात में भारी बढ़ोतरी की दिशा में काम कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा शुरू किए गए ढांचागत बदलावों से यह संभव हुआ है।
केंद्रीय मंत्री ने मुंबई में निर्यात बढ़ाने के उपायों पर चर्चा के लिए निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी), कमोडिटी बोर्ड एवं प्राधिकरणों और अन्य हितधारकों के साथ हुई बैठक के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आह्वान लोकल गोज ग्लोबल : दुनिया के लिए मेक इन इंडिया के क्रम में वर्ष 2021-22 के लिए 400 अरब डॉलर के वाणिज्यिक निर्यात का लक्ष्य तय किया गया है।
श्री गोयल ने कहा, छोटे-छोटे लक्ष्यों और परामर्श की रणनीति के माध्यम से यह लक्ष्य तय किया गया है, जहां हर देश, उत्पाद, निर्यात संवर्धन परिषद और विदेशी मिशन के लिए विशेष लक्ष्य तय किए गए हैं। 400 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्य की चुनौती के लिए तुरंत कार्य करें।
केंद्रीय मंत्री ने 2021-22 के लिए 400 अरब डॉलर के वाणिज्यिक निर्यात को हासिल करने की चुनौती से पार पाने के लिए सभी निर्यात संवर्धन परिषदों से तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया। श्री गोयल ने कहा, हमें इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रति महीने 34 अरब डॉलर के निर्यात के साथ, अगले 8 महीनों के लिए निर्यात की गति को बरकरार रखने की जरूरत है। यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन यदि सभी ईपीसी और उनके सदस्य मिलकर काम करें तो यह संभव है।
केंद्रीय मंत्री ने निर्यातक समुदाय से वर्ष 2030 तक एक लाख डॉलर के वाणिज्यिक निर्यात और एक लाख के सेवा निर्यात सहित कुल दो लाख डॉलर के निर्यात के लक्ष्य पर काम करने के लिए कहा। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि एक लाख डॉलर के सेवा निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने के क्रम में वाणिज्य मंत्रालय में सेवा क्षेत्र पर केंद्रित दो अलग विभाग स्थापित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की रणनीति को फिर से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ज्यादा संवादात्मक प्रक्रिया में मुक्त व्यापार समझौते तैयार किए जा रहे हैं, हम यह सुनिश्चित करने के लिए उद्योग के साथ जुड़ रहे हैं कि एफटीए निष्पक्ष और समानता के साथ तैयार किए जाएं। साथ ही, एफटीए एकतरफा नहीं हो सकते, यदि हम विदेशी बाजारों में बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं तो हमें भी अपने बाजार खोलने की आवश्यकता है। इसलिए, हमें ऐसे क्षेत्रों की पहचान की आवश्यकता है, जहां हम प्रतिस्पर्धा में खड़े हो सकते हैं। यदि सामूहिक प्रयास के तौर पर हम ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर सकें जहां हम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा में सक्षम हों तो हम तेजी से निष्पक्षता के साथ एफटीए तैयार कर सकते हैं।
विभिन्न विकसित देशों के साथ एफटीए की प्रगति की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यूनाटेड किंगडम , यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और जीसीसी देशों के साथ एफटीए के मामले में हमने काफी सकारात्मक प्रगति की है। हमारा प्रयास ऐसे देशों पर ध्यान केंद्रित करना है, जहां हमारे पास पर्याप्त क्षमताएं हैं, जहां हम बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं और जहां बाजार का आकार काफी बड़ा है।
ईयू के साथ एफटीए पर, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री की अच्छी छवि और उनकी विश्वसनीयता के चलते ही संभव हुआ है कि ईयू एक बार फिर से एफटीए के लिए बातचीत के लिए राजी हो गया है। उन्होंने कहा, इसमें तेजी लाने के लिए भारत पूरी मेहनत करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानदंडों दोनों के अध्ययन व मानदंडों के आधार पर बदलाव करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, स्वैच्छिक रूप से और खुशी-खुशी गुणवत्ता मानकों को स्वीकार करें व अपनाएं। हमारे उद्योगों को वैश्विक गुणवत्ता मानदंडों के अनुरूप बनाएं।

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