खुद का है एक सवाल, क्यों पशु हूं न इंसान बना
उन्नाव
न साधु संत न बैरागी, न मन का ही धनवान बना। खुद से खुद का है एक सवाल, क्यों पशु हूं न इंसान बना। संतों की डगर चला लेकिन, बदले तो बस वस्त्र आभूषण, मन में झांका तो अजब हाल, अंदर बैठे थे खरदूसन क्या क्या न किया क्या न कहा तन दुष्शासन मन रावन है, जो लाया था वो बेदाग चुनर, वो दिल को लाज अपावन है, महलों के ख्वाब सजोंता हूं, न मंदिर का दरबान बना, खुद से खुद का है इक सवाल। इन पंक्तियों को कहते हुए बेजुबानों के मसीहा माने जाने वाले गौसेवक अखिलेश अवस्थी अक्सर बेजुबान जीवों की उपेक्षा सरकारी गौशालाओं में होते हुए देखकर बिफर पडते हैं। उनका मानना ये है कि सरकार द्वारा संचालित कराई जा रही गौशालाओं में अगर इन जीवों के लिए चारा इत्यादि की व्यवस्था भी नही हो पा रही तो ऐसी योजनाओं के संचालक का क्या मकसद। बुनियादी स्तर पर बीजेपी की सरकार प्रदेश में आने के बाद सडकों पर घूमने वाले बेजुबान जीवों के रहने वाला उनके भोजन इत्यादि को देखते हुए गौशाओं के निर्माण की घोषणा हुयी, उधर इन जीवों के जीवन संवरने की आस कुछ इस कदर जागी कि लोगों ने सरकार के इस कदम की भूरि भूरि प्रशंसा की। लेकिन हद तब पार हो गयी जब गौशालाओं में जीवों की मौत के मामले सामने आने लगे। कई बार भुखमरी के चलते बीमार होकर भी गौवंशियों ने अपनी जान तक गवाई। अभी ताजा मामला पालिका की एक गौशाला का सामने आया है। जहां पर रविवार को 4 गायों की मौत हो गई। यह जानकारी हनुमंत जीव आश्रय सेवा संस्थान के संस्थापक एवं बेजुबान जीवों के मसीहा के रुप में सुविख्यात अखिलेश अवस्थी को जैसे ही हुयी उन्होने तत्काल धरने पर बैठने का ढृढ़़ निश्चय किया तो प्रशासन भी हरकत में आया। इधर गायों की मौत के बाद प्रशासन के हाथ पांव फूल गये उधर अखिलेश अवस्थी के धरने पर बैठने से लोग जुटने लगे। एक तरफ प्रशासन उक्त स्थल पर जांच करने पहुंचा तो दूसरी तरफ प्रशासन के ही अफसर उनको धरना समाप्त करने की मिन्नत करने में जुटे देखे गये। चूंकि अखिलेश अवस्थी द्वारा जनपद के सभी घायल जीवों का संरक्षण व सेवा पूरी निष्ठा के साथ की जाती है। ऐसे में प्रशासन ने उनके धरने पर बैठते ही अनुमान लगा लिया कि कही मामला मीडिया के माध्यम से लखनऊ में गर्माया तो उसकी गूंज राजधानी ही नही अपितु पूरे प्रदेश में इसका नकारात्मक असर सरकार की छवि पर पडेगा। ऐसे में यह अनुमान लगाना गलत न होगा कि सरकार बनते ही यह योजना प्राथमिकता में चलाई गई लेकिन धरातल पर इसकी हकीकत उलट आने के पीछे मुख्य कारण कही न कही प्रशासन की लापरवाही की चर्चाएं आम लोगो में हो रही है। पालिका की गौशाला में गौवंशियों के मौत के कारणों की भी टीम बनाकर जांच होनी चााहिए। हालांकि नपा के जिम्म्ेदार धरना स्थल पर पहुंचकर मान मनौवल करते देखे गये। लेकिन श्री अवस्थी ने तल्क लहजे में कह दिया कि अगर 24 घंटे में प्रशासन गौशालाओं की व्यवस्था सुदृढ एवं सुव्यस्थित नही कराता है तो मै पुनः धरने पर बैठने को बाध्य होउंगा।
पूर्व में भी कई बार शिकायतें तो की गई लेकिन प्रशासन ने अपने ढर्रें में सुधार करने की जहमत नही उठायी।
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कही भी भूख से जानवर नही मरने चाहिए। लापरवाही नही की जानी चाहिए। अगर कोई गौशाला में ऐसा कोई मामला आता है तो उसपेे शीघ्र कार्यवाही की जायेगी।।
एस.के. मलिक, सीवीओ डायरेक्टर लखनऊ
