बुंदेला विद्रोह” के मंचन से बताई आजादी के आंदोलन की अमर गाथा
झाँसी
आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित बुन्देलखण्ड नाट्य कला केन्द्र के आठवें नाट्य रंग समारोह का भव्य शुभारंभ सिद्धेश्वर आई.टी.आई. नगर स्थित बुंदेलखंड नाट्य कला केन्द्र स्टूडियो थिएटर में राजकीय संग्रहालय के उपनिदेशक डा. सुरेश कुमार दुबे व सदर विधायक रवि शर्मा की धर्म पत्नी श्रीमती सुनीता शर्मा के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्वालियर के प्रसिद्ध रंगकर्मी प्रदीप दीक्षित व दिनेश द्विवेदी की उपस्थिति ने रंग महोत्सव को और भी अधिक गरिमामय बना दिया।प्रख्यात रंगकर्मी डा. हिमांशु द्विवेदी के निर्देशन व डा.कृपांशु द्विवेदी के संयोजन में अभिनीत नाटक ” बुंदेला विद्रोह ” स्वाधीनता आंदोलन की वह प्रथम अमर गाथा है जिसे बुंदेलखंड के 1842 का प्रथम महासमर के रूप में ऐतिहासिक ख्याति प्राप्त है। ” बुंदेला विद्रोह ” नाटक में तत्कालीन बुंदेला राजा मधुकरशाह के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े गये युद्ध का जहाँ सजीव अभिनय देखने को मिला वहीं उस काल की सामाजिक परिस्थितियाँ , अंग्रेजों के अत्याचार , दमनकारी नीतियों आदि का रोमांचक चित्रण बुंदेलखंड नाट्य कला केन्द्र के कलाकारों नेअपने जीवंत अभिनय द्वारा प्रस्तुत किया। नाट्य विधा के आवश्यक तत्व सूत्रधार, दृश्य परिवर्तन , प्रकाश संयोजन एवं कथानक के अनुरूप पार्श्व संगीत संयोजन आदि की उत्कृष्ट प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बाँधे रखने में आशातीत सफलता प्राप्त की। बुंदेलखंड के झाँसी जैसे अविकसित परिवेश में जो राष्ट्रीय उपलब्धियाँ बुंदेलखंड नाट्य कला केन्द्र (समिति ) ने अपने कठिन परिश्रम और निजी प्रयासों से रंगमंच के क्षेत्र में अर्जित कीं हैं वह अभिनंदनीय हैं और प्रशंसनीय भी।देश के जानेमाने रंगकर्मी , स्वाँग विधा के प्रसिद्ध अध्येता और प्रस्तोता डा. हिमांशु द्विवेदी ने अपनी मौलिकताएँ , नवीन शोध दृष्टि , गहन संप्रेषणीयता तथा भावानुकूल संवाद संयोजन, रसों का परिपाक आदि नाटक की शास्त्रीय विधाओं का अत्यंत सफल संयोजन करके लगभग दो सौ साल पुराने बुंदेली विद्रोह के इतिहास को अपने थियेटर में हुबहू उतार कर कला पारखियों को हैरत में डालकर उनकी अनुकूलता प्राप्त की। डा. हिमांशु के अनुज और निर्देशक डा. कृपांशु द्विवेदी का विशिष्ट रंगमचीय संयोजन देखती ही बनता है।
बुंदेलखंड नाट्य कला केन्द्र द्वारा आयोजित आठवें नाट्य महोत्सव की सात दिवसीय रंग महोत्सवश्रंखला आजादी के अमृत महोत्सव को समर्पित है।
