मुख्यमंत्री ने साबित कर दिया, मध्यप्रदेश में उनसे बड़ा जननेता नहीं

भोपाल।

प्रदेश में हुए उपचुनाव की शानदार जीत ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के नंबर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष बढ़ गए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर्ताधर्ता भी इस जोड़ी से प्रसन्न हैं। भाजपा का जिस तरह से हिमाचल, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में सफाया हुआ है और कर्नाटक में वह मुख्यमत्री के गृह क्षेत्र में हारी है उसको देखते हुए मध्य प्रदेश और असम के चुनाव परिणाम पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को राहत देने वाले हैं। इसमें कोई शक नहीं कि मप्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की भाजपा में पकड़ और मजबूत हुई है। मुख्यमंत्री शिवराज  सिंह चौहान ने साबित किया है कि प्रदेश में उन से बड़ा कम्युनिकेटर और जन नेता और कोई नहीं है। मुख्यमंत्री ने इस बार चुनाव प्रचार अभियान के दौरान अलग शैली अपनाई। उन्होंने सिर्फ  चुनावी सभाएं नहीं ली बल्कि लगातार चुनाव प्रभारियों सक फीडबैक लिया। यह फीडबैक भी केवल मंत्रियों और विधायकों से नहीं लिया तो मंडल स्तर के पदाधिकारियों से भी चर्चा की। इसके अलावा वे आदिवासियों और दलितों के घरों में रात को रुके और उनके यहां भोजन किया। उनकी यह शैली दलित और आदिवासी मतदाताओं को बेहद पसंद आई। इसका चुनाव पर भारी असर पड़ा। विशेषकर पृथ्वीपुर सीट भाजपा केवल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करिश्मे के कारण जीती है। इस सीट पर उन्होंने अतिरिक्त ध्यान दिया था। भाजपा पृथ्वीपुर को प्रारंभ से कमजोर मान रही थी लेकिन चुनाव अभियान के मध्य में आकर उसे लगा कि यह सीट जीती जा सकती है। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां हर तरीका अपनाया जिसका अनुकूल परिणाम दिखा। समाजवादी पृष्ठभूमि के डॉक्टर शिशुपाल यादव की ओबीसी और दलित मतदाताओं में अच्छी पकड़ थी इसका लाभ पार्टी को मिला। बहुजन समाज पार्टी के कोर वोटर भी भाजपा से जुड़े। मुकाबला सवर्ण बनाम ओबीसी होने का फायदा भी भाजपा को मिला। सििति यह थी कि भाजपा के राजपूत नेता भी पृथ्वीपुर में परोक्ष रूप से कांग्रेस की जीत चाहते थे लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐसा नहीं होने दिया। दूसरी तरफ रैगांव विधानसभा सीट पार्टी सवर्ण विशेषकर ब्राह्मण मतदाताओं में सतना के सांसद गणेश ङ्क्षसह को लेकर नाराजगी थी जो लगातार सवर्ण विरोधी बयान देते हैं। बहुजन समाज पार्टी के चुनाव नहीं लडऩे के कारण बपा का वोट बैंक कांग्रेस की ओर हो गया। कांगेे्रस के नेता अजय सिंह ने इसके लिए विशेष प्रयास किए। प्रदेश की भाजपा राजनीति में मुख्यमंत्री की स्थिति बेहद मजबूत हो गई है। आने वाले दिनों में उन्हें निगम मंडलों में नियुक्तियां तथा मंत्रिमण्डल में फेरबदल या विस्तार करना होगा। माना जा रहा है कि सुलोचना रावत को मंत्री बनाया जा सकता है जिससे आदिवासियों में भाजपा की उपस्थिति और मजबूत हो। जोबट विधानसभा के प्रभारी रमेश मेंदोला ने भी अपनी उपयोगिता साबित की है। उन्हें भी मंत्रिमण्डल में लेने का दबाव मुख्यमंत्री पर रहेगा। मुख्यमंत्री कुछ मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं तथा दो मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। निगम मंडलों में नियुक्ति के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबाव रहेगा। वे अपने कम से कम चार समर्थकों को निगम मंडल में देखना चाहते हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इन सभी नियुक्तियों में फ्री हैंड मिलना तय है। प्रधानमंत्री 15 नवम्बर को मध्य प्रदेश की यात्रा पर आ रहे हैं। इस दिन आदिवासी महाकुंभ भोपाल में होने जा रहा है। प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद नियुक्तियों का सिलसिला प्रारंभ होगा अनुमान लगाया जा रहा है।

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