जन औषधि केंद्रों में कहीं दवा नहीं तो कहीं चिकित्सकों को भरोसा नहीं

पिथौरागढ़। सरकार ने रोगियों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए खोले जन औषधि केंद्र का लाभ सीमांत के लोगों को नहीं मिल रहा है। अधिकतर जन औषधि केंद्रों में दवाओं की भारी कमी है और अगर कहीं दवा है भी तो चिकित्सक जैनेरिक दवाओं पर भरोसा नहीं जताते। केंद्रों में दवा रखे-रखे ही खराब हो रही है, लेकिन चिकित्सक पर्चे में जैनेरिक दवा नहीं लिखते। वहीं एक्का-दुक्का केंद्र लंबे समय से बंद हैं। केंद्रों में मानक अनुसार दवा उपलब्ध नहीं है। केंद्रों में 300 से अधिक प्रकार की दवा उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन कई केंद्रों में 30 से 70 प्रकार की दवा ही मौजूद है। इसके अलावा जिला अस्पताल में औसतन 400 व सीएचसी केंद्रों में 70-100 रोगी ओपीडी में पहुंचते हैं, लेकिन जन औषधी केंद्रों में दवा के लिए 20 से 30 फीसदी लोग ही खरीदारी को आते हैं। दवाओं की कमी और चिकित्सकों का जैनेरिक दवाएं न लिखने से लोग बाजार से महंगे दाम पर दवा खरीदने को मजबूर हैं।

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