कश्मीर की वीरंगनाओं की गौरव गाथा बताने वाली पुस्तक श्स्त्रीदेशश विमोचित

नई दिल्ली

अविभाजित जम्मू-कश्मीर के गौरवशाली इतिहास की वीरंगनाओं की शौर्य गाथा को सामने लाने वाली पुस्तक श्स्त्रीदेशश् प्रकाशित हो गई है। विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी और इंदिरा गांधी सेंटर फॉर द आर्ट्स एंड कल्चर (आईजीएनसीए) के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने पुस्तक का विमोचन किया।
गहन शोध पर आधारित आशीष कौल की यह पुस्तक कश्मीर और भारत के गौरवशाली इतिहास के उन पन्नों को पलटने का दावा करती हैं, जो कभी पलटे ही नहीं गए। इसमें जम्मू-कश्मीर की उन 13 महान महिलाओं के जीवन और इतिहास का वर्णन है, जिनकी निशानियों को विभिन्न अत्याचारियों और कट्टरपंथियों ने मिटा दिया।
लेखक और निर्देशक आशीष कौल ने कहा है कि श्स्त्रीदेशश् अपनी तरह का एक ऐसा पहला दृश्य श्रव्य दस्तावेज है, जो इस तरह महिलाओं की शोध परख कहानियां सामने लाकर उनका दस्तावेजीकरण कर रहा है। फिल्म और शोध पुस्तक के अलावा श्स्त्रीदेशश् प्रॉजेक्ट में 13 स्वतंत्र पुस्तकें शामिल हैं, जो इन महान महिलाओं के जीवन और इतिहास का वर्णन करती हैं। इस कड़ी में पहली पुस्तक श्दिद्दा द वॉरियर क्वीन ऑफ कश्मीरश् का विमोचन मेगा स्टार अमिताभ बच्चन ने किया था। कौल ने कहा कि श्स्त्रीदेशश् प्रॉजेक्ट के लिए पिछले 6 वर्षों में अपने राज्य से जुड़े इतिहास की खोज में वह अफगानिस्तान और ईरान सहित दुनिया के कई दुर्गम भौगोलिक इलाकों में गए।
आशीष कौल ने कहा, इस मौके पर मैं उन 13 महिलाओं के एक ऐसे पिता की तरह महसूस करता हूं, जिन्हें इतिहास और हमारे अपने देश ने भुला दिया था। दुनिया को यह जानने की जरूरत है कि दुनिया में सबसे बड़ी उपलब्धियां जिसमें खाद्यान्न के सार्वजनिक वितरण का दुनिया का पहला नेटवर्क शामिल है। उन्होंने कहा कि पहली सहकारी बैंकिंग प्रणाली, दुनिया की पहली वेतन वाली सेना, दुनिया की सबसे पहली कमांडो फोर्स, काउंटर इंटेलिजेंस मैकेनिज्म, अब तक की सबसे बड़ी युद्ध रणनीति- गुरिल्ला युद्ध, सरकार का संसदीय स्वरूप सहित कई अन्य कर सुधार दुनिया को जम्मू और कश्मीर की महिलाओं से मिले एक उपहार थे। कौल ने कहा कि दुर्भाग्य से इतिहासकारों और विभिन्न पक्षपाती सरकारों ने हमारी महिलाओं की इस महिमा को मिटा दिया।

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