आईआईटी ने जल संरक्षण के लिए उठाए कदम

रुडकी। आईआईटी रुड़की ने कस्तूरबा भवन और जल संसाधन विकास और प्रबंधन विभाग में प्रदर्शन इकाइयों के रूप में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए। इसके जरिए जागरूकता का प्रयास किया जाएगा।
कस्तूरबा भवन में लगाए गए मॉडल से हर साल 7.5 लाख लीटर पानी दोबारा जमीन में पहुंचाया जाएगा। वर्षा जल के भंडारण के लिए रूफ-टॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग मॉडल डब्ल्यूआरडीएम विभाग के पीछे स्थापित किया गया है जहां 3.5 लाख लीटर बारिश के पानी के इकठ्ठा होने की उम्मीद है। इसके अलावा डब्ल्यूआरडीएम विभाग के पीछे रिचार्ज पिट्स और रिचार्ज शाफ्ट मॉडल भी बनाए गए हैं। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का उद्घाटन करते हुए आईआईटी रुड़की के निदेशक और ग्रीन कमेटी के अध्यक्ष प्रो. अजीत के चतुर्वेदी ने कहा वर्षा जल संचयन, बारिश के पानी को बहने देने के बजाय उसे जमा करके उसका भंडारण करने की तकनीक है। कस्तूरबा भवन में और डब्ल्यूआरडीएम में स्थापित किए गए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर आईआईटी रुड़की के वर्षा जल को बहने देने के बजाये उसका संग्रहण करके पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने के प्रयासों का प्रतिनिधित्व करता है। जल संसाधन विकास और प्रबंधन विभाग के प्रो. दीपक खरे ने कहा कि रूफटॉप हार्वेस्टिंग में छत को कैचमेंट बनाया जाता है। बारिश के पानी को भवन की छत पर इकठ्ठा किया जाता है, जिसके बाद इस पानी को या तो एक टैंक में संग्रहीत किया जा सकता है या कृत्रिम पुनर्भरण प्रणाली की ओर मोड़ा जा सकता है। यह विधि कम खर्चीली और बहुत प्रभावी है और यदि इसे ठीक से लागू किया जाए तो यह क्षेत्र के भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है।

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