चकराता छावनी क्षेत्र में बंदरों के आतंक से लोग परेशान
विकासनगर। चकराता छावनी के बाशिंदों को बंदरों के आतंक से निजात नहीं मिल पा रही है। क्षेत्रवासियों की कई बार मांग के बाद भी न छावनी परिषद न ही वन विभाग इस ओर कार्यवाही कर रहा है। उधर, स्थानीय लोगों को इसके चलते भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। चकराता छावनी क्षेत्र में वर्षो से बंदरों ने अपना डेरा जमाया हुआ है। पिछले कुछ महीनों से बंदरों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। वर्ष 2009 में छावनी परिषद द्वारा बंदरों को पकड़वा कर बादशाही बाग के जंगलों में छोड़ दिया गया था, जिसके बाद लोगों को कुछ राहत मिली थी। पिछले कई महीनों से बंदरों की तादाद में एकाएक बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे इनका आतंक बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि बंदरों के आतंक से लोगों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष पंकज जैन, व्यापार मंडल अध्यक्ष केशर चौहान, सुनील जैन, अरवीना जोशी, गोपाल तोमर, रविश अरोड़ा, विनय शर्मा, राजकुमार मेहता आदि का कहना है कि बंदर दुकानों और घरों से सामान उठा कर ले जाते हैं। साथ ही सड़क से गुजर रहे राहगीरों पर भी हमला कर देते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और स्कूल जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ रही है। उन्होंने वन विभाग और कैंट प्रशासन को बंदरों का बंध्याकरण कराने की मांग की है। संपर्क करने पर मुख्य अधिशासी अधिकारी कैंट बोर्ड आरएन मंडल का कहना है कि इस मामले में वन विभाग के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा। कैंट प्रशासन के पास सीधे तौर पर बंदर पकड़वाने का कोई प्रावधान नहीं है।
