रजनी टोला में पीने के स्वच्छ पानी के लिए आइपीएफ ने लिखा डीएम को पत्र

 

म्योरपुर/सोनभद्र

म्योरपुर ब्लाक के बेलहत्थी गांव के रजनी टोला में प्रदूषित पानी पीने से हुई करीब आधा दर्जन मौतों पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के नेता दिनकर कपूर ने डीएम को पत्र भेज गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व मुख्य सचिव उ0 प्र0 को भी भेजी गई है। पत्र में आइपीएफ नेता श्री कपूर ने बताया कि विगत दिनों आइपीएफ जिला संयोजक कृपाशंकर पनिका व मजदूर किसान मंच के जिला सचिव रमेश सिंह खरवार के नेतृत्व में गई जांच टीम ने देखा कि गांव में कल्लू उम्र 2 वर्ष, राजेश खरवार उम्र 27 वर्ष, ननकी देवी उम्र 30 वर्ष, संतवती, हरीकिशुन, रोमा बैगा उम्र 2 वर्ष की उल्टी, दस्त आदि से मृत्यु हो गई है। गांवों वालों ने टीम को बताया कि गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था न होने के कारण लोग रिहन्द डैम का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है और इसी कारण बीमार होकर मर रहे है। जबकि वर्ष 2019 में इसी गांव में प्रदूषित पानी को पीने के कारण कई आदिवासियों व ग्रामीणों की मृत्यु हुई थी। जिसके खिलाफ की गई शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वाद संख्या दर्ज कर उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और डीएम सोनभद्र को ग्रामीणों के प्राणों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया था। जिस पर कार्यवाही करते हुए शासन ने  रजनी टोला में शुद्ध पेयजल के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना करने और रीवां-राची मार्ग से रजनी टोला सम्पर्क मार्ग का निर्माण करने का निर्णय लिया था। जिसमें से सम्पर्क मार्ग तो बन रहा है लेकिन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट व स्वास्थ्य केन्द्र के निर्माण कार्य में कोई प्रगति नहीं है। स्थिति इतनी बुरी है कि एक अदद हैण्डपम्प तक नहीं लगवाया गया। परिणामस्वरूप आज भी लोग बेमौत मर रहे है। ऐसी स्थिति में पुनः निवेदन किया गया कि बेलहत्थी ग्रामसभा के रजनी टोला में शुद्ध पेयजल के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, हैण्डपम्प, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना की जाए और रीवां-राची मार्ग से रजनी टोला सम्पर्क मार्ग को ऊंच बडवान एवं नीच बडवान होते हुए राजस्व ग्राम निहाई पाथर तक विस्तारित करने के लिए सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश देने का कष्ट करे ताकि भविष्य में आवागमन की कठिनाई के कारण किसी भी ग्रामीण को चिकित्सा लाभ या पेयजल की सुविधा से वंचित होकर अकाल मृत्यु का सामना न करना पड़े।

 

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