हमीरपुर में है हजारों साल पुराना कल्प वृक्ष -वेद पुराणों में भी इसका जिक्र
हमीरपुर ……
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना नदी के तट पर स्थित 1000 साल पुराना ऐतिहासिक कल्पवृक्ष है. इस पेड़ का अपना पौराणिक महत्त्व है. माना जाता है कि आज भी यह लोगों की मनोकामना पूरी कर वातावरण को शुद्ध बनाये हुए है. इसी मान्यता के चलते लोग दूर-दूर से इस कल्पवृक्ष पर अपनी मनोकामनाओं के धागे बांध कर मुरादे मांगने आते हैं।
इस पेड़ का जिक्र पुराणों में भी है. इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय समुद्र से निकले 14 रत्नों में से एक कल्प वृक्ष भी था, जिसे द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के कहने पर धरती पर लाए थे. उन्ही पेड़ों में से एक पेड़ हमीरपुर की धरती पर यमुना के किनारे लगा हुआ है, जो लोगों की आस्था का केंद्र है. इसके साथ ही अनेकों किवदंतियां भी इस कल्प वृक्ष से जुड़ी हुई हैं. कहीं इसे भगवान कृष्ण का अवतार माना जाता है, तो कहीं कहा जाता है कि पृथ्वी पर जब जीवन की उत्पत्ति हुई तो सबसे पहले कल्पवृक्ष ही धरती पर आया. साथ ही यह माना जाता है कि पृथ्वी के अंत के बाद भी इसका अस्तित्व रहेगा।
इस कल्पवृक्ष की उम्र 1000 साल बताई जाती है. पास से देखने पर इसका तना हाथी के पैर जैसा दिखाई देगा .वहीं, इसकी छाल हाथी की खाल जैसी दिखती है. बता दें कि इस पेड़ को उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने अपने संरक्षण में ले रखा है. इसकी जिम्मेदारी से देखरेख भी की जाती है. झाड़ की तरह दिखने वाले इस कल्पवृक्ष में पत्ते या फूल बहुत कम ही देखने को मिलते हैं. फिलहाल इस पेड़ में थोड़े बहुत ही पत्ते बचे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस प्रकार का कल्पवृक्ष केवल यमुना नदी के किनारे ही मिलता है. कल्पवृक्ष को और भी कई नामों से जाना जाता है. जैसे-कल्पतरु, सुरतरु, देवतरु और कल्पलता।
