एक दशक बाद भी नहीं मिल सकी मंजूरी
ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश में गंगा की सहायक चंद्रभागा नदी के किनारे को अतिक्रमण से बचाने की योजना को एक दशक बाद भी मंजूरी नहीं मिल सकी है। चंद्रभागा नदी के तटबंध को आस्थापथ की तर्ज पर विकसित करके अवैध कब्जों को रोका जाना था। शहर के बीचों बीच चंद्रभागा नदी को अतिक्रमण के ग्रहण से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने शासन को लगभग 10 साल पहले नदी के किनारों को पक्का करने का प्रस्ताव भेजा था। लंबा समय बीतने के बाद भी प्रस्ताव सरकारी फाइलों में धूल फांकता रहा। इस बीच तहसील प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई विभाग, पुलिस फोर्स की संयुक्त टीम नदी किनारे बनी अवैध झुग्गी झोपडिय़ों को हटाती रही, लेकिन तटबंध फिर भी अतिक्रमण से मुक्त नहीं हो सका। कुंभ 2021 में सिंचाई विभाग ने एक बार फिर चंद्रभागा नदी तटबंध को आस्थापथ की तर्ज पर विकसित करने के लिए करोड़ों का प्रस्ताव भेजा। लेकिन प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिली। पखवाड़ाभर पहले पर्वतीय क्षेत्र में लगातार बारिश से चंद्रभागा नदी के उफनने पर जिलाधिकारी खुद ऋषिकेश पहुंचे और नदी किनारे पसरे अतिक्रमण को हटाने और बाढ़ की आशंका को देखते हुए यहां रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए। बारिश में हर बार प्रशासन को इस तरह की कसरत करनी पड़ती है। चंद्रभागा नदी के दोनों तटबंध को आस्था पथ की तर्ज पर विकसित करने के लिए दो बार शासन को करीब 12 करोड़ 60 लाख का प्रस्ताव भेज चुके हैं, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। योजना के साकार होने से अतिक्रमण से स्थायी निजात मिलती। बार-बार अतिक्रमण हटाने में समय खराब नहीं करना पड़ता।
