पंडित तेजेंद्र मजूमदार की सरोद प्रस्तुति ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

देहरादून,

स्पिक मैके के तत्वावधान में प्रसिद्ध सरोद वादक पंडित तेजेंद्र मजूमदार द्वारा सरोद प्रस्तुति का आयोजन आज नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद विजुअल डिसएबिलिटीज (एनआईईपीवीडी) और हिम ज्योति स्कूल में किया गया। इस अवसर पर पंडित तेजेंद्र मजूमदार की सरोद की प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर पंडित तेजेंद्र मजूमदार के साथ तबले पर श्री शुभ महाराज थे। मजूमदार ने अपना पसंदीदा राग बसंत पंचम बजाया और अपने खूबसूरत आलाप के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। मजूमदार ने राग झिंझोटी की प्रस्तुति दी और एक भावपूर्ण मूड बनाया। उन्होंने मिश्रा खमाज में एक धुन के साथ अपने प्रदर्शन का समापन किया। इस अवसर पर बोलते हुए, पंडित तेजेंद्र मजूमदार ने कहा कि सितार की तरह, सरोद की भी अपनी परिभाषा होती है, जिसमें श्राश् वाद्य के विभिन्न स्थानों से अलग-अलग प्रभाव प्रदान करता है। नोट-निर्वाह इसका मजबूत बिंदु है। इस अवसर पर पंडित तेजेंद्र मजूमदार एक प्रसिद्ध सरोद वादक हैं, जो सेनिया-मैहर घराने के हैं। उन्होंने अपने दादा बिभूति रंजन (मैंडोलिन पर), पंडित अमरेश रॉय चौधरी (मुखर और तबला), और 18 साल उस्ताद बहादुर खान (सरोद) सहित विभिन्न गुरुओं के साथ अध्ययन किया है। इस अवसर पर अनेक शिक्षक व छात्र छात्रायें मौजूद रही।

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