दूसरे साल भी बंदी से बेहाल बुक एवं स्टेशनरी कारोबारी
रुडकी
रुडक़ी के बुक-स्टेशनरी कारोबारी लगातार दूसरे साल बंदी से बेहाल हैं। स्कूल पहले से बंद है और कोविड कर्फ्यू में दुकानों पर भी ताला लटका हुआ है। बैंक की किश्त, दुकान का किराया और कर्मचारियों के वेतन के खर्च की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ रही है। नई शिक्षा नीति की तैयारी से गोदामों में डंप पड़ी किताबों के रद्दी होने का डर भी इन्हें सता रहा है।
