हैलट अस्पताल की इमरजेंसी से मरीज को भर्ती नहीं करने का मामला शासन तक पहुंचा
कानपुर
शहर में मुख्यमंत्री की मौजूदगी होने के बावजूद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल की इमरजेंसी से शनिवार को मरीज को भर्ती नहीं करने का मामला शासन तक पहुंच गया है। मंडलायुक्त के निर्देश पर रविवार को दो सदस्यीय जांच टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची और जांच के बाद रिपोर्ट सौंप दी।
हैलट इमरजेंसी से शनिवार दोपहर मकनपुर,बिल्हौर से ऑक्सीजन सपोर्ट में आए गंभीर मरीज को वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहकर टरका दिया था। इस प्रकरण को मंडलायुक्त डॉ राजशेखर ने संज्ञान में लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी डॉ.महेंद्र कुमार एवं अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (एडी हेल्थ) डॉ.जीके मिश्रा की दो सदस्यीय टीम को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा था। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो आरबी कमल का कहना है कि इस प्रकरण की स्वयं जांच की है। शनिवार को मेडिसिन आइसीयू में 14 वेंटिलेटर बेड हैं,जो फुल थे। मरीज नॉन कोविड था। ऐसे में उसे वेंटिलेटर मुहैया कराना संभव नहीं था। जब स्वजन को इसकी जानकारी दी गई तो वह खुद ही मरीज को लेकर यहां से चले गए।
मरीज तो भर्ती नहीं हुआ और फिर भी जांच में मिली क्लीनचिट
हैलट इमरजेंसी से शनिवार दोपहर मकनपुर,बिल्हौर से ऑक्सीजन सपोर्ट में आए गंभीर मरीज को वेंटिलेटर खाली न होने की बात कहकर टरका दिया था। इस प्रकरण को मंडलायुक्त डॉ राजशेखर ने संज्ञान में लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी डॉ.महेंद्र कुमार एवं अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (एडी हेल्थ) डॉ.जीके मिश्रा की दो सदस्यीय टीम को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा था। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो आरबी कमल का कहना है कि इस प्रकरण की स्वयं जांच की है। शनिवार को मेडिसिन आइसीयू में 14 वेंटिलेटर बेड हैं,जो फुल थे। मरीज नॉन कोविड था। ऐसे में उसे वेंटिलेटर मुहैया कराना संभव नहीं था। जब स्वजन को इसकी जानकारी दी गई तो वह खुद ही मरीज को लेकर यहां से चले गए।
मरीज तो भर्ती नहीं हुआ और फिर भी जांच में मिली क्लीनचिट
हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में मरीज को भर्ती न करने के मामले में गठित जांच टीम ने आधी-अधूरी जांच करके रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंपी है। मरीज तो भर्ती नहीं हुआ और फिर भी क्लीनचिट,यह समझ से परे है। जांच टीम की रिपोर्ट भी निजी अस्पताल के पक्ष में है। बिना निजी अस्पताल को भुगतान किए मरीज के स्वजन कैसे निकल आए, यह भी बड़ा सवाल है। मंडलायुक्त डॉ.राजशेखर के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी और एडी हेल्थ हैलट अस्पताल गए थे। जब मरीज भर्ती ही नहीं हुआ तो उसके अभिलेख कहां से मिल गए। स्वजन से बात कैसे हो गई। जबकि वहां जिम्मेदार डॉक्टर मौजूद नहीं था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मरीज दो दिन निजी अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर पर था,वहां से बिना रेफरल और बिना डिस्चार्ज कराए ही ले आए। नॉन कोविड वेंटिलेटर खाली न होने पर कहीं और लेकर चले गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मरीज को भर्ती करने से किसी ने मना नहीं किया है।
