रैगांव में प्रत्याशियों से ज्यादा शिवराज और कमलनाथ की साख दांव पर

सतना,।

रैगांव का उपचुनाव कमोबेश प्रत्याशियों से अधिक शिवराज और कमलनाथ की साख का सवाल बन गया है। जहां शिवराज पहले ही कह चुके हैं कि यहां से प्रतिमा नहीं वो चुनाव लड़ रहे हैं वहीं कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष उन्हें चुनौती देकर अपने 15 महीने के कार्यकाल का हिसाब देने के लिए ललकार चुके हैं। लेकिन मगर अब तक के प्रचार को देखा जाए तो सचमुच शिवराज कमलनाथ के प्रति हमलावर अंदाज में अपने प्रत्याशी का प्रचार कर रहे हैं। महीनेभर के भीतर आधा दर्जन सभाएं कर उन्होंने कांग्रेस में खलबली मचा दी है। शिवराज के हमलावर अंदाज के कारण कांग्रेस भी अपने बड़े नेताओं को उतारने जा रही है। जल्द ही प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक और कमलनाथ फिर से आने वाले हैं। शिवराज और कमलनाथ के बीच फर्क है कि शिवराज आम जनता के मुद्दों को अपनी योजनाओं में शामिल कर मंच से भाषणों में उन संवेदनाओं के साथ उठाते हैं जो जनमानस के अंतस को छू जाती है। भाषणों में सियासत के अलावा भावुकता का पुट देकर मतदाताओं की सहज सहमति पा लेते हैं। जबकि कांग्रेस के नेताओं के पास सिवाय सरकार और शिवराज को कोसने के आलवा कुछ नहीं होता। शिवराज की सतना जिले में समर्थन इसलिए भी मिलता रहा है कि वो यहां आते-जाते रहते हैं, जकि कमलनाथ ने पार्टी की गुटबाजी के चलते यहां से दूरी बनाए रखी। उनका दिल महाकौशल में बसता है। लिहाजा रैगांव के उपचुनाव में उनकी मौजूदगी से कल्पना वर्मा को कितना फायदा हुआ नतीजों से ही साफ होगा।

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