घर की आधी भलि को साकार कर रहे भाष्कर

 

बागेश्वर। लॉकडाउन के दौरान प्राइवेट कंपनी की नौकरी छूटने के बाद भाष्कर ने अपने गांव आकर स्वरोजगार को रोजगार का जरिया बनाया। साथ ही घर की आधी भलि जैसी बातों को चरितार्थ किया है। उनका यह जुनून उन्हें ऊचाइयों तक ले जा रहा है। उन्होंने गांव में पशुपालन के साथ फ्रूट प्रोससिंग कार्य शुरू किया है। संतरा व माल्टा के बाद अब वह बुरांश को जूस बना रहे हैं। जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

लॉकडाउन के प्रथम चरण में देहरादून में कंपनी में इंजीनियरिंग का कार्य कर रहे जौलकांडे निवासी भास्कर लोहुमी की कंपनी का काम बंद हो गया। जिस पर वह अपने पैतृक गांव जौलकांडे आ गया। यहां आकर उसने फूल की खेती की तथा दो गाय पालकर दूध व्यवसाय प्रारंभ किया। साथ ही प्रायोगिक तौर पर नींबू, अदरक, हरी मिर्च,आंवला आदि का आचार बनाया। साथ ही संतरे व माल्टा का आचार बनाया। जिसमें सफलता मिली। भास्कर लोहुमी बताते हैं कि इस बार उन्होंने फसाई का लाइसेंस ले लिया है। अब उनका प्रयास है कि एक कंपनी की धरातल पर स्थापना की जाए, जिसमें कई युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है। बताया कि विगत माह उन्होंने 213 लीटर माल्टा व संतरे का जूस बनाया, जिसे गांव समेत आसपास के लोगों व परिचितों ने खरीद लिया। जिससे वे काफी उत्साहित हैं। बताया कि उनके द्वारा इन दिनों बुरांश का जूस बनाने का कार्य किया जा रहा है। उनका लक्ष्य है कि इस बार लगभग पांच सौ लीटर बुरांश जूस का उत्पादन का लक्ष्य है। बताया कि अब तक उन्होंने इस कार्य के लिए मशीनों का प्रयोग नहीं किया है। पूरी तरह से कार्य को प्राकृतिक तरीके से ही किया जाता है।

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