सीआरपीएफ ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आतंक के खिलाफ जंग में निभाई अहम भूमिका – शाह
श्रीनगर
गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में तेजी से सामान्य हो रही स्थिति पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि जल्दी ही वह दिन भी आएगा कि राज्य में सीआरपीएफ की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। सीआरपीएफ के 83वें स्थापना दिवस पर जम्मू में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए उन्होंने बल की भूमिका की सराहना की।
गृहमंत्री शाह ने कहा सीआरपीएफ ने न सिर्फ घाटी में आतंकवाद से लड़ने में अहम भूमिका निभाई, बल्कि कानून व्यवस्था को मजबूत करने का काम भी किया है। सीआरपीएफ ने जम्मू-कश्मीर, उत्तर पूर्व और नक्सल प्रभावित इलाकों में बेहतरीन काम किया है। मुझे यकीन है कि आने वाले कुछ सालों में इन तीनों क्षेत्रों में सीआरपीएफ की जरूरत नहीं होगी। इसका पूरा श्रेय सीआरपीएफ को ही जाएगा।
सीआरपीएफ की तारीफ करते हुए शाह ने कहा पिछले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सुधार देखने को मिला है। सीआरपीएफ जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने आर्टिकल 370 और 35ए को हटाने के बारे में बात की। उन्होंने कहा इसका फायदा जम्मू-कश्मीर के आम लोगों को हुआ है। बता दें कि यह पहली बार है, जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बाहर जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया गया।
सीआरपीएफ जवानों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि मैं सीआरपीएफ जवानों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देता हूं। मैं सीआरपीएफ के शहीदों को श्रद्धांजलि देता हूं। ऐतिहासिक शहर जम्मू में सीआरपीएफ स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया जा रहा है। मैं सबसे पहले माता वैष्णो देवी को प्रणाम करना चाहता हूं।
अमित शाह ने कहा कि जम्मू वह जगह है, जहां प्रेमनाथ डोगरा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एक राष्ट्र, एक ध्वज, एक संविधान के लिए आंदोलन शुरू किया। हमें खुशी है कि हम डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों को पूरा कर सके। अमित शाह ने कहा सीआरपीएफ ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने और आतंक के खिलाफ लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाके हों या कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों से लड़ रहे हों या पूर्वोत्तर, सीआरपीएफ ने देश की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है।
