ऐतिहासिक और पौराणिक स्थली बिठूर को अर्थ गंगा प्रोजेक्ट के तहत संवारा जाएगा
कानपुर।
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की धरोहर को समेटे बिठूर को अर्थ गंगा प्रोजेक्ट के तहत संवारा जाएगा। यहां के ध्रुव टीला को भी कटान से बचाया जाएगा। साथ ही इसे संवारा जाएगा। पूरे बिठूर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाना है। इसके लिए अर्थ गंगा प्रोजेक्ट के तहत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने का कार्य सितंबर से शुरू होगा। बिठूर को न सिर्फ उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर प्रचारित किया जाएगा बल्कि दूसरे प्रान्तों में भी इसके प्रचार पर फोकस किया जाएगा।
बिठूर अपने आंचल में न सिर्फ धार्मिक इतिहास समेटे हुए है बल्कि स्वतंत्रता संग्राम से भी इस कस्बे का इतिहास जुड़ा हुआ है। बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट पर ही भगवान ब्रह्मा का मंदिर है। जिसे ब्रम्ह खूंटी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यहीं भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी और ब्रम्हेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की। महर्षि वाल्मीकि का आश्रम भी यहीं पर है। कहते हैं कि लव कुश का जन्म यहीं हुआ था। यहां पर ध्रुव टीला भी है। ध्रुव राजा उत्तानपाद की पत्नी सुनीति के पुत्र थे। राजा की दूसरी पत्नी का नाम सुरुचि था। एक बार ध्रुव पिता की गोद मे बैठे थे तभी सुरुचि वहां पहुंच गईं और उन्हें गोद से उतार दिया। इससे दुःखी ध्रुव ने तप किया तो उन्हें भगवान विष्णु के दर्शन हुए। जहां ध्रुव ने तप किया उस स्थल को ही ध्रुव टीला के रूप में जाना जाता है। यहीं पर नानाराव पेशवा का किला भी था जो अब ध्वस्त हो गया है। यहां नाना के साथ रानी लक्ष्मी बाई का बचपन बीता था। अब बिठूर को पर्यटन के नक्शे पर चमकाने की तैयारी है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये खर्च होना है । पर्यटन विभाग इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनवाने जा रहा है। कंसल्टेंट नामित किया जा रहा है। माना जा रहा है को दीपावली से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी आधारशिला रखेंगे।
बिठूर अपने आंचल में न सिर्फ धार्मिक इतिहास समेटे हुए है बल्कि स्वतंत्रता संग्राम से भी इस कस्बे का इतिहास जुड़ा हुआ है। बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट पर ही भगवान ब्रह्मा का मंदिर है। जिसे ब्रम्ह खूंटी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यहीं भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी और ब्रम्हेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की। महर्षि वाल्मीकि का आश्रम भी यहीं पर है। कहते हैं कि लव कुश का जन्म यहीं हुआ था। यहां पर ध्रुव टीला भी है। ध्रुव राजा उत्तानपाद की पत्नी सुनीति के पुत्र थे। राजा की दूसरी पत्नी का नाम सुरुचि था। एक बार ध्रुव पिता की गोद मे बैठे थे तभी सुरुचि वहां पहुंच गईं और उन्हें गोद से उतार दिया। इससे दुःखी ध्रुव ने तप किया तो उन्हें भगवान विष्णु के दर्शन हुए। जहां ध्रुव ने तप किया उस स्थल को ही ध्रुव टीला के रूप में जाना जाता है। यहीं पर नानाराव पेशवा का किला भी था जो अब ध्वस्त हो गया है। यहां नाना के साथ रानी लक्ष्मी बाई का बचपन बीता था। अब बिठूर को पर्यटन के नक्शे पर चमकाने की तैयारी है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये खर्च होना है । पर्यटन विभाग इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनवाने जा रहा है। कंसल्टेंट नामित किया जा रहा है। माना जा रहा है को दीपावली से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी आधारशिला रखेंगे।
